ट्रिपल एस ओ न्यूज, सूरतगढ़, 18 अगस्त। (सुभाष सिंह) शहर में नगरपालिका कार्यालय के समीप स्थित प्राचीन गणेश मंदिर ढाब पर अमृत 2.0 योजना के तहत चल रहा सौंदर्यकरण एवं वाटर पार्क निर्माण कार्य विवादों में घिरता नजर आ रहा है। लाखों-करोड़ों रुपये की लागत से प्रस्तावित इस कार्य को लेकर स्थानीय नागरिकों ने निर्माण की गुणवत्ता, कार्य की धीमी गति, जल निकासी व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी पर सवाल उठाए हैं।
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| अमृत 2.0 के वाटर पार्क निर्माण पर उठे सवाल |
स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य लंबे समय से बेहद धीमी गति से चल रहा है। वहीं, कुछ स्थानों पर निर्माण सामग्री और कार्य की गुणवत्ता को लेकर भी शिकायतें सामने आई हैं। नागरिकों का कहना है कि निर्माण पूरा होने से पहले ही कुछ हिस्सों की परतें उखड़ने लगी हैं। ऐसे में सरकारी बजट के सदुपयोग को लेकर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है।
करीब एक वर्ष से चल रहा निर्माण कार्य
प्राप्त जानकारी के अनुसार, वाटर पार्क निर्माण का टेंडर नगरपालिका की तत्कालीन अधिशासी अधिकारी पूजा शर्मा के कार्यकाल में जारी हुआ था। भादरा की एक फर्म/ठेकेदार द्वारा करीब एक वर्ष से निर्माण कार्य करवाया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि ठेकेदार को अब तक कार्य के एवज में काफी भुगतान किया जा चुका है। हालांकि, भुगतान और कार्य की वास्तविक प्रगति की स्थिति आधिकारिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
शिकायत के बाद EO के एपीओ होने को लेकर भी चर्चा
स्थानीय नागरिकों द्वारा निर्माण कार्य की गुणवत्ता और अन्य समस्याओं को लेकर तत्कालीन ईओ मनीष पारीक को ज्ञापन सौंपकर शिकायत की गई थी। शिकायत के एक-दो दिन बाद उनके एपीओ होने को लेकर भी क्षेत्र में चर्चाएं हुईं। हालांकि, दोनों घटनाओं के बीच किसी आधिकारिक संबंध की पुष्टि नहीं हुई है।
इसके बाद सूरतगढ़ नगरपालिका में अधिशासी अधिकारी के रूप में गणपतराम को नियुक्त किया गया। पदभार संभालने के बाद नए ईओ द्वारा शहर के विभिन्न वार्डों का निरीक्षण किया गया तथा कर्मचारियों के कार्यक्षेत्र में बदलाव कर जिम्मेदारियां निर्धारित की गई हैं।
बारिश होते ही निर्माण स्थल में भर जाता है पानी
स्थानीय नागरिकों के अनुसार, निर्माण कार्य शुरू करने से पहले बरसाती पानी और सामान्य जल निकासी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई। ढाब क्षेत्र में खुदाई के बाद बारिश होने पर दोबारा पानी भर जाता है। आसपास के वार्डों और सड़कों पर भी जलभराव की समस्या सामने आ रही है।
लोगों का कहना है कि मामूली बारिश के बाद भी रास्तों पर पानी जमा हो जाता है, जिससे आवागमन प्रभावित होता है। जल निकासी को लेकर स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
निर्माण स्थल पर सूचना बोर्ड नहीं होने से पारदर्शिता पर सवाल
नगरपालिका कार्यालय के समीप शहर के प्रमुख स्थान पर चल रहे इस बड़े निर्माण कार्य के स्थल पर सूचना बोर्ड नहीं होने की बात भी सामने आई है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि निर्माण कार्य से संबंधित योजना, स्वीकृत राशि, कार्य अवधि, ठेकेदार फर्म और अन्य आवश्यक जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित होनी चाहिए, ताकि आमजन को परियोजना की वास्तविक स्थिति की जानकारी मिल सके।
तकनीकी टीम से जांच की मांग
स्थानीय नागरिकों ने नगरपालिका के नए ईओ गणपतराम से मांग की है कि वे एईएन एवं तकनीकी टीम के साथ मौके का निरीक्षण करें। नागरिकों ने निर्माण में इस्तेमाल सामग्री की गुणवत्ता, कार्य की प्रगति, स्वीकृत लागत, अब तक किए गए भुगतान तथा निर्माण कार्य की तकनीकी गुणवत्ता की जांच करवाने की मांग की है।
इसके साथ ही नागरिकों ने आसपास के वार्डों में जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान करने तथा निर्माण कार्य को निर्धारित गुणवत्ता और समयसीमा के अनुसार पूरा करवाने की मांग की है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि नगरपालिका प्रशासन इन शिकायतों पर तकनीकी जांच करवाता है या नहीं और जांच में निर्माण कार्य की गुणवत्ता एवं भुगतान से जुड़े आरोपों की वास्तविक स्थिति क्या सामने आती है।

