ट्रिपल एस ओ न्यूज, सूरतगढ़, 27 जुलाई | सुभाष सिंह ।शहर के वार्ड संख्या 38 एवं 39 स्थित प्राचीन गणेश मंदिर ढाब में अमृत 2.0 योजना के तहत लाखों रुपये की लागत से बनाए जा रहे वाटर पार्क (सौंदर्यीकरण) के निर्माण कार्य को लेकर स्थानीय लोगों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। सोमवार को वार्ड के जागरूक नागरिकों ने नगरपालिका के अधिशासी अधिकारी (ईओ) मनीष पारीक को ज्ञापन सौंपकर निर्माण कार्य की गुणवत्ता और जल निकासी की समस्या से अवगत कराया।
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| सूरतगढ़ में अमृत 2.0 के वाटर पार्क निर्माण पर उठे सवाल, घटिया निर्माण सामग्री व जल निकासी व्यवस्था को लेकर ईओ को सौंपा ज्ञापन |
ज्ञापन में बताया गया कि यह निर्माण कार्य पूर्व ईओ पूजा शर्मा के कार्यकाल में स्वीकृत हुआ था और पिछले कई महीनों से भादरा के एक ठेकेदार द्वारा कराया जा रहा है। लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य में मानकों की अनदेखी करते हुए घटिया निर्माण सामग्री का उपयोग किया जा रहा है, जिसके कारण तैयार की गई परतें उखड़ने लगी हैं। वहीं, ढाब की खुदाई के बाद बारिश का पानी दोबारा भर जाने से निर्माण कार्य भी प्रभावित हो रहा है।
स्थानीय नागरिकों ने बताया कि गणेश मंदिर ढाब का सौंदर्यीकरण तो शुरू कर दिया गया, लेकिन आसपास के वार्डों एवं शहर के बरसाती व सामान्य पानी की निकासी के लिए कोई स्थायी व्यवस्था नहीं की गई। दो दिन पूर्व हुई मामूली बारिश में ही वार्डों में जलभराव हो गया, जिससे लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया। जल निकासी को लेकर कई स्थानों पर लोगों के बीच विवाद की स्थिति भी देखने को मिली।
ज्ञापन में मांग की गई कि वार्ड 38 और 39 से पुराने पंप हाउस तक नाले का निर्माण कराया जाए, ताकि बरसाती पानी की सुचारु निकासी हो सके। लोगों ने बताया कि पहले इन वार्डों का पानी गणेश मंदिर ढाब में चला जाता था, लेकिन वर्तमान में वहां निर्माण कार्य चलने के कारण पानी की निकासी पूरी तरह बाधित हो गई है।
वार्डवासियों ने निर्माण कार्य की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराने तथा गुणवत्ता की जांच करवाने की मांग भी उठाई। साथ ही उन्होंने नगरपालिका उपखंड प्रशासक भरत जयप्रकाश मीणा और ईओ मनीष पारीक से मांग की कि निर्माण स्थल पर सूचना बोर्ड लगाया जाए, जिसमें परियोजना की लागत, कार्य प्रारंभ होने की तिथि, ठेकेदार का नाम, कार्य पूर्ण होने की समय-सीमा तथा निर्माण की गारंटी अवधि जैसी जानकारी स्पष्ट रूप से अंकित हो। उनका कहना है कि इससे आमजन में पारदर्शिता बढ़ेगी और प्रशासन के प्रति विश्वास भी मजबूत होगा।

