तालवा गांव की राजपूत समाज की भौमका (श्मशान भूमि) बचाने के लिए ग्रामजन एकजुट

ट्रिपल एस ओ न्यूज, बीकानेर। जैसा कि आप सभी के संज्ञान में है, तालवा गांव की राजपूत समाज की पारंपरिक भौमका (श्मशान भूमि) को अवैध रूप से प्रभावित किए जाने के विरोध में ग्रामजन लगातार एकजुट होकर अपनी आवाज उठा रहे हैं। इस संबंध में ग्रामवासियों ने बताया कि तालवा और मुकाम के लोगों के बीच सदियों से भाईचारे, सहयोग और पारस्परिक सम्मान का संबंध रहा है। दोनों समाजों ने हमेशा एक-दूसरे की परंपराओं और भावनाओं का सम्मान किया है तथा विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक आयोजनों में अपनी सामर्थ्य के अनुसार सहयोग दिया है।

तालवा गांव की राजपूत समाज की भौमका (श्मशान भूमि) बचाने के लिए ग्रामजन एकजुट
तालवा गांव की राजपूत समाज की भौमका (श्मशान भूमि) बचाने के लिए ग्रामजन एकजुट


ग्रामजनों के अनुसार, कुछ समय से उनकी श्मशान भूमि को समाप्त करने अथवा उस पर अतिक्रमण करने के प्रयास किए जा रहे हैं। पूर्व में भी श्मशान भूमि को अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने का प्रस्ताव रखा गया था, जिसे सर्वसमाज की बैठक में ग्रामवासियों ने विनम्रतापूर्वक अस्वीकार कर दिया था। उनका कहना है कि यह भूमि उनकी भावनाओं, परंपराओं और पूर्वजों की स्मृतियों से जुड़ी हुई है। यहां पीढ़ियों से उनके पूर्वजों का अंतिम संस्कार होता आया है और भविष्य में भी इसी स्थान पर अंतिम संस्कार की परंपरा जारी रखने की उनकी इच्छा है।

ग्रामवासियों का दावा है कि यह श्मशान भूमि मुकाम की स्थापना से भी पहले से अस्तित्व में है तथा इसके संबंध में उनके पास ऐतिहासिक दस्तावेज उपलब्ध हैं। उनका कहना है कि समय के साथ विभिन्न कारणों से भूमि का क्षेत्रफल लगातार कम होता गया और अब केवल लगभग एक से डेढ़ बीघा भूमि ही शेष बची है।

ग्रामजनों ने आरोप लगाया कि हाल ही में स्वीकृत फोर-लेन सड़क परियोजना का मार्ग इस प्रकार प्रस्तावित किया जा रहा है कि शेष बची श्मशान भूमि भी प्रभावित हो सकती है। उनका कहना है कि यदि ऐसा हुआ तो यह भूमि लगभग समाप्त हो जाएगी, जिससे समाज की धार्मिक एवं सामाजिक भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचेगी।

इस विषय पर समाजबंधुओं के साथ विचार-विमर्श के बाद ग्रामवासियों ने निर्णय लिया है कि वे अपनी श्मशान भूमि के संरक्षण के लिए लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से संघर्ष जारी रखेंगे। उन्होंने समाज के सभी लोगों से इस मुद्दे पर सहयोग और समर्थन देने की अपील की है।

इस संबंध में सोमवार, 8 जून 2026 को प्रातः 11:00 बजे बीदासर हाउस, बीकानेर में एक बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें समाजबंधुओं एवं शुभचिंतकों की उपस्थिति अपेक्षित है।

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