ट्रिपल एस ओ न्यूज, बीकानेर, 5 जून। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर वंदे मातरम टीम द्वारा सादुल स्कूल भ्रमण पथ पर पर्यावरण महोत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के तहत वृक्षारोपण, वृक्ष पूजन तथा पर्यावरण संरक्षण के विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए।
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| विश्व पर्यावरण दिवस पर वंदे मातरम टीम का अनूठा पर्यावरण महोत्सव वृक्षों को रक्षा सूत्र बांधकर लिया संरक्षण का संकल्प, गायत्री मंत्रोच्चार के साथ किया पूजन |
कार्यक्रम संयोजक पुरुषोत्तम सुथार ने बताया कि इस अवसर पर वृक्षों को रक्षा सूत्र (मोली) बांधकर उनकी सुरक्षा एवं संरक्षण का संकल्प लिया गया। स्कूली बच्चों ने अपने जन्मदिन पर एक-एक पौधा लगाने का संकल्प लेते हुए पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाने का संदेश दिया।
महिलाओं ने पीपल वृक्ष की पूजा कर सामूहिक रूप से गायत्री मंत्र का उच्चारण किया तथा वृक्षों से लिपटकर उन्हें बचाने का संकल्प लिया। इस अवसर पर वंदे मातरम टीम के प्रतिनिधि कमल सेन ने कहा कि “पेड़ बचेंगे तो हम बचेंगे।” उन्होंने बताया कि विश्व पर्यावरण दिवस पर प्रातः 8 बजे सादुल स्कूल पार्क में पांच पौधों का रोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया। साथ ही जुलाई माह में व्यापक पौधरोपण अभियान चलाने की घोषणा भी की गई।
वंदे मातरम टीम के संयोजक विजय कोचर ने कहा कि टीम द्वारा उन वृक्षों का सामूहिक सम्मान किया गया जो वर्षों से मानव समाज को ऑक्सीजन, छाया, फल-फूल तथा पक्षियों एवं अन्य जीव-जंतुओं को आश्रय प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वृक्ष केवल प्रकृति की धरोहर नहीं बल्कि जीवन के आधार हैं, इसलिए उनका संरक्षण प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।
उमा बागड़ी, जसोदा खत्री एवं उमा शर्मा ने सामूहिक गायत्री मंत्रोच्चार के साथ वृक्षों को रक्षा सूत्र बांधकर पीपल वृक्ष की परिक्रमा की और उनके प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हुए पर्यावरण सुरक्षा का संकल्प दोहराया।
कार्यक्रम में विजय कोचर, पुरुषोत्तम सुथार, चेतन सिंह पंवार, उमा बागड़ी, जसोदा खत्री, उमा शर्मा, कमल सेन, गोविन्द सिंह कच्छावा, किशन, जीतू, अक्षय, लक्ष्य, यश, निखिल, श्री गोपाल चौधरी, श्री गोपाल जाट, कन्हैयालाल टाक, श्री भाटी जी, महावीर पारीक तथा राजस्थान सरकार के राज्य अनुसूचित आयोग के सदस्य सूरजाराम नायक सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन-जन को जागरूक करना, अधिकाधिक लोगों को इस अभियान से जोड़ना तथा समाज के समक्ष वृक्षों के महत्व को रेखांकित करना रहा।

