दो करोड़ का वाटर पार्क घटिया निर्माण की भेंट चढ़ा, निर्माण से पहले ही उखड़ने लगी परतें

ट्रिपल एस ओ न्यूज, सूरतगढ़, 25 अगस्त। सुभाष सिंह। प्राचीन ढाब का अधिकांश हिस्सा अतिक्रमण की भेंट चढ़ चुका है। अब प्रदेश सरकार की अमृत 2.0 योजना के तहत ढाब के शेष बचे एक चौथाई से भी कम हिस्से को करीब दो करोड़ रुपये की लागत से वाटर पार्क के रूप में विकसित करवाया जा रहा है। हालांकि निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर स्थानीय लोगों ने गंभीर सवाल उठाए हैं।

दो करोड़ का वाटर पार्क घटिया निर्माण की भेंट चढ़ा, निर्माण से पहले ही उखड़ने लगी परतें
दो करोड़ का वाटर पार्क घटिया निर्माण की भेंट चढ़ा, निर्माण से पहले ही उखड़ने लगी परतें

तत्कालीन ईओ पूजा शर्मा के कार्यकाल में वाटर पार्क निर्माण के लिए टेंडर जारी किए गए थे, जिसे भादरा की एक ठेकेदार फर्म को दिया गया। ठेकेदार फर्म ने ढाब के बचे अवशेष में भरे गंदे पानी की निकासी और पैंदे में जमा गाद निकालने में ही करीब 6 से 8 माह का समय लगा दिया। अब निर्माण कार्य शुरू होने के बाद दीवारों में पुरानी ईंटों और गुणवत्ताहीन निर्माण सामग्री के इस्तेमाल के आरोप सामने आए हैं।

जांच के आदेश के अगले दिन ईओ का एपीओ

वाटर पार्क के आसपास रहने वाले लोगों ने नए पदस्थापित ईओ मनीष पारीक से निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की जांच करवाने की मांग की थी। बताया जा रहा है कि ईओ ने जांच के लिए एईएन को निर्देश भी दिए। इसके अगले ही दिन ईओ मनीष पारीक के एपीओ के आदेश जारी हो गए। स्थानीय लोगों का कहना है कि घटनाक्रम ने वाटर पार्क निर्माण की गुणवत्ता और पूरी प्रक्रिया को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्रस्तावित वाटर पार्क में सुबह-शाम घूमने के लिए चारों ओर फुटपाथ, सौंदर्यवर्धक फूलदार पौधे, बच्चों के लिए झूले और पैडल से चलने वाली नाव की सुविधा प्रस्तावित है। वाटर पार्क के तल पर पक्का प्लास्टर किया जाना है, ताकि पानी साफ बना रहे।

गुणवत्ता जांच पर भी सवाल

स्थानीय लोगों का आरोप है कि ठेकेदार फर्म द्वारा अब तक किया गया काम गुणवत्ताहीन है, इसके बावजूद पालिका के एईएन और जेईएन द्वारा निर्माण कार्य की गुणवत्ता की प्रभावी जांच नहीं की जा रही है। वहीं, निर्माण स्थल पर अब तक ऐसा बोर्ड भी नहीं लगाया गया है, जिसमें परियोजना की लागत और कार्य पूर्ण करने की निर्धारित अवधि की जानकारी दी गई हो।

पालिका प्रशासन की कार्यशैली को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल नगर पालिका में चुनावी गतिविधियां चल रही हैं। पार्षद और अध्यक्ष पद के लिए दावेदारी कर रहे लोग शहर की ऐतिहासिक ढाब की दुर्दशा और करोड़ों रुपये की लागत से हो रहे निर्माण को लेकर खुलकर आवाज उठाते नजर नहीं आ रहे हैं।

ठेकेदार फर्म द्वारा धीमी गति से काम किए जाने के कारण स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्तमान रफ्तार रही तो कार्य पूरा होने में अभी एक वर्ष से अधिक समय लग सकता है।

बॉक्स : पालिका कर चुकी है 40 प्रतिशत से अधिक भुगतान

सूत्रों के अनुसार, निर्माण कार्य की गुणवत्ता की पूरी तरह जांच किए बिना ही नगर पालिका द्वारा ठेकेदार फर्म को करीब 40 प्रतिशत से अधिक राशि का भुगतान किया जा चुका है। इसी ठेकेदार फर्म द्वारा मुख्य बाजार में डिवाइडर का निर्माण भी करवाया गया था, जिसकी गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं।

बॉक्स : स्वतंत्र कमेटी से जांच की मांग

शहरवासियों का कहना है कि वाटर पार्क निर्माण में गुणवत्ताहीन सामग्री के इस्तेमाल के आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। लोगों ने मांग की है कि पूरे मामले की जांच के लिए स्वतंत्र कमेटी का गठन किया जाए, ताकि निर्माण की गुणवत्ता, भुगतान और कार्य की प्रगति की वास्तविक स्थिति सामने आ सके। जांच में यदि अनियमितताएं प्रमाणित होती हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

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