आत्मरक्षा के साथ संस्कृति का संगम: क्षत्रिय सभा के पांच दिवसीय शिविर का शुभारंभ

ट्रिपल एस ओ न्यूज, बीकानेर। वर्तमान समय में आत्मरक्षा प्रत्येक व्यक्ति की आवश्यकता बन चुकी है, वहीं अपनी सांस्कृतिक विरासत को सहेजना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इसी उद्देश्य को लेकर क्षत्रिय सभा एवं ट्रस्ट बीकानेर संभाग तथा श्री आशापुरा कलेक्शन बीकानेर के संयुक्त तत्वावधान में पांच दिवसीय निःशुल्क आत्मरक्षा एवं साफा प्रशिक्षण शिविर का बुधवार को बीदासर हाउस में शुभारंभ हुआ।

आत्मरक्षा के साथ संस्कृति का संगम: क्षत्रिय सभा के पांच दिवसीय शिविर का शुभारंभ
आत्मरक्षा के साथ संस्कृति का संगम: क्षत्रिय सभा के पांच दिवसीय शिविर का शुभारंभ


कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं सेवानिवृत्त पुलिस कल्याण संस्थान बीकानेर के जिला अध्यक्ष मनोहर सिंह लूना ने कहा कि बदलते सामाजिक परिवेश में हर व्यक्ति को अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा के प्रति सजग रहना चाहिए। आत्मरक्षा का प्रशिक्षण न केवल आत्मविश्वास बढ़ाता है बल्कि आपात परिस्थितियों में स्वयं की रक्षा करने में भी सक्षम बनाता है। उन्होंने कहा कि आधुनिकता की दौड़ में नई पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक पहचान से दूर होती जा रही है, जबकि साफा और पगड़ी राजस्थान की गौरवशाली परंपरा, सम्मान और स्वाभिमान के प्रतीक हैं।

आत्मरक्षा के साथ संस्कृति का संगम: क्षत्रिय सभा के पांच दिवसीय शिविर का शुभारंभ
आत्मरक्षा के साथ संस्कृति का संगम: क्षत्रिय सभा के पांच दिवसीय शिविर का शुभारंभ


शिविर में साफा बांधने का प्रशिक्षण प्रसिद्ध प्रशिक्षक विक्रम सिंह चौहान तथा आत्मरक्षा का प्रशिक्षण अहमदाबाद से आई प्रशिक्षिका सोनलबा परिहार द्वारा दिया जा रहा है। दोनों प्रशिक्षकों का क्षत्रिय सभा की ओर से स्वागत एवं सम्मान किया गया।

क्षत्रिय सभा के अध्यक्ष करण प्रताप सिंह सिसोदिया ने बताया कि शिविर में बीकानेर सहित सर्व समाज के युवक-युवतियां और महिलाएं भाग ले रही हैं। पांच दिनों तक चलने वाले इस प्रशिक्षण शिविर में प्रतिभागियों को आत्मरक्षा के व्यावहारिक गुरों के साथ विभिन्न प्रकार के साफे बांधने की पारंपरिक विधियां सिखाई जाएंगी।

शिविर प्रभारी प्रदीप सिंह चौहान ने बताया कि सभा पिछले आठ वर्षों से समाजहित एवं संस्कृति संरक्षण के उद्देश्य से ऐसे बहुउद्देशीय शिविरों का सफल आयोजन करती आ रही है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में प्रशिक्षणार्थियों, उनके परिजनों तथा समाज के गणमान्य लोगों की उपस्थिति रही।

यह शिविर युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.