ट्रिपल एस ओ न्यूज, बीकानेर, 7 जून। राष्ट्रीय कवि चौपाल की 571वीं साप्ताहिक श्रृंखला विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस एवं राजस्थानी भाषा के पुरोधा साहित्य साधकों को समर्पित सम्मान मंथन के रूप में आयोजित की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. हरिदास हर्ष ने की, जबकि मुख्य अतिथि समाजसेवी दिनेश सिंह भदोरिया एवं विशिष्ट अतिथि शिक्षाविद प्राचार्या श्रीमती अलका डोली पाठक रहे। संस्थापक सदस्य सरदार अली परिहार भी मंचासीन रहे।
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| विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस एवं राजस्थानी भाषा के ऋषि पुरोधा साधक को समर्पित राष्ट्रीय कवि चौपाल की 571वीं श्रृंखला आयोजित |
कार्यक्रम में राष्ट्रीय कवि चौपाल के संस्थापक एवं संयोजक रामेश्वर साधक ने बताया कि चौपाल के 12वें वर्ष में प्रवेश के उपलक्ष्य में आगामी 573वीं श्रृंखला से तीन नए सम्मान प्रारंभ किए जाएंगे। उन्होंने साहित्य और संस्कृति के संरक्षण में कवियों एवं साहित्यकारों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
संस्थापक सदस्य सरदार अली परिहार ने अपनी काव्यात्मक अभिव्यक्ति में आदर्श समाज निर्माण में साहित्यकारों की भूमिका को रेखांकित किया। अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. हरिदास हर्ष ने हास्य-व्यंग्य और काव्यमय शैली में कार्यक्रम की समीक्षा करते हुए साहित्य की संवेदनशीलता एवं सामाजिक सरोकारों पर प्रकाश डाला।
मुख्य अतिथि दिनेश सिंह भदोरिया ने अपने जीवन संस्मरण साझा करते हुए कहा कि व्यक्ति को निरंतर सेवा के अवसर तलाशते रहना चाहिए तथा समाजहित के कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभानी चाहिए। उन्होंने सामूहिक परिवार व्यवस्था और मानवीय मूल्यों को जीवन की सबसे बड़ी पूंजी बताया।
विशिष्ट अतिथि प्राचार्या श्रीमती अलका डोली पाठक ने कहा कि कवि केवल शब्दों का सृजनकर्ता नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाला प्रकाशपुंज होता है, जिसकी लेखनी से साहित्य की उज्ज्वल किरणें प्रस्फुटित होती हैं।
इस अवसर पर राष्ट्रीय कवि चौपाल द्वारा पांच दशकों से मानव एवं जीव सेवा में समर्पित समाजसेवी दिनेश सिंह भदोरिया तथा शिक्षाविद प्राचार्या अलका डोली पाठक का शॉल, श्रीफल एवं रत्नजड़ित मोतियों की माला पहनाकर सम्मान किया गया। उपस्थित साहित्यकारों एवं साहित्य प्रेमियों ने करतल ध्वनि से दोनों अतिथियों का अभिनंदन किया।
कार्यक्रम के दौरान लगभग 20 साहित्यकारों की रचनाओं का लोकार्पण भी किया गया। आयोजन में करणी सिंह, साकिर हुसैन (पत्रकार), किशनलाल सरदाना, कमल तंवर, छोटू खां खोखर, मदनलाल सोनी, एडवोकेट अनिल योगी, धर्मेंद्र राठौड़, धनंजय, श्रीकांत सहित अनेक साहित्य अनुरागी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का प्रभावी एवं काव्यमय संचालन श्रीमती पम्मी कोचर आचार्य ने किया, जबकि अंत में रामेश्वर साधक ने सभी अतिथियों एवं सहभागियों का आभार व्यक्त किया।

