बसंत पंचमी 23 जनवरी को, मां सरस्वती की विशेष कृपा पाने का अत्यंत शुभ पर्व

ट्रिपल एस ओ न्यूज, फतेहाबाद। सनातन धर्म में ज्ञान, बुद्धि, कला और विद्या की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती की आराधना हेतु मनाया जाने वाला बसंत पंचमी का पर्व अत्यंत पावन, शुभ और फलदायी माना गया है। यह पर्व प्रतिवर्ष माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है, जो इस वर्ष 23 जनवरी 2026, शुक्रवार को श्रद्धा, भक्ति एवं उल्लास के साथ मनाया जाएगा।

बसंत पंचमी 23 जनवरी को, मां सरस्वती की विशेष कृपा पाने का अत्यंत शुभ पर्व
बसंत पंचमी 23 जनवरी को, मां सरस्वती की विशेष कृपा पाने का अत्यंत शुभ पर्व

श्री सनातन धर्म मंदिर, हुड्डा सेक्टर-3 फतेहाबाद के विद्वान आचार्य पंडित बाबूलाल शास्त्री ने जानकारी देते हुए बताया कि धार्मिक ग्रंथों एवं पुराणों के अनुसार इसी पावन तिथि को मां सरस्वती का प्राकट्य हुआ था। यही कारण है कि यह दिन विशेष रूप से विद्यार्थियों, शिक्षकों, कलाकारों, लेखकों, संगीतकारों एवं साधकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है।

उन्होंने बताया कि बसंत पंचमी को अबूझ मुहूर्त कहा गया है, अर्थात इस दिन किसी भी प्रकार के शुभ कार्य के लिए अलग से मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती। इस दिन विद्यारंभ संस्कार, अन्नप्राशन, मुंडन, सगाई, विवाह, गृह प्रवेश, नए व्यवसाय या कार्य की शुरुआत करना अत्यंत शुभ एवं सफलतादायक माना गया है।

विद्यार्थियों के लिए विशेष उपाय

पंडित बाबूलाल शास्त्री ने बताया कि जो विद्यार्थी परीक्षा या प्रतियोगिता की तैयारी कर रहे हैं, उन्हें बसंत पंचमी के दिन पीले रंग की कलम को मां सरस्वती के चित्र के सामने रखकर हल्दी, रोली और अक्षत से विधिवत पूजन करना चाहिए। इसके पश्चात उसी कलम से अध्ययन व परीक्षा में प्रयोग करने से मां सरस्वती की विशेष कृपा प्राप्त होती है और सफलता के योग प्रबल होते हैं।

स्नान-दान का विशेष महत्व

उन्होंने बताया कि बसंत पंचमी पर स्नान और दान का भी विशेष धार्मिक महत्व है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान कर मां गंगा, यमुना एवं सरस्वती का ध्यान करते हुए दान-पुण्य करने से जीवन की अनेक बाधाएं दूर होती हैं। जरूरतमंद विद्यार्थियों को कलम, कॉपी, पुस्तक या शिक्षा हेतु आर्थिक सहयोग प्रदान करने से मां सरस्वती अत्यंत प्रसन्न होकर विद्या, विवेक, यश और समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करती हैं।

कला एवं साधना में निपुणता के उपाय

कला क्षेत्र से जुड़े साधकों को बसंत पंचमी के दिन पीले वस्त्र धारण कर, मां सरस्वती को पीले पुष्प, पीले फल एवं मिष्ठान अर्पित कर विधिवत पूजा करनी चाहिए। साथ ही “ह्रीं वाग्देव्यै ह्रीं ह्रीं” मंत्र का अधिक से अधिक जप करने से संगीत, लेखन, चित्रकला एवं अन्य कलाओं में विशेष सफलता प्राप्त होती है।

बच्चों के लिए अचूक उपाय

पंडित शास्त्री ने बताया कि यदि माता-पिता चाहते हैं कि उनके बच्चों पर पूरे वर्ष मां सरस्वती की कृपा बनी रहे तो बसंत पंचमी के दिन बच्चों के अध्ययन कक्ष में मां सरस्वती की प्रतिमा, चित्र या सरस्वती यंत्र को विधि-विधान से स्थापित कर नियमित धूप-दीप एवं प्रार्थना करनी चाहिए। इससे बच्चों की बुद्धि, स्मरण शक्ति, एकाग्रता और विवेक में निरंतर वृद्धि होती है।

अंत में उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि बसंत पंचमी के पावन अवसर पर मां सरस्वती की सच्चे मन से आराधना कर अपने जीवन को ज्ञान, संस्कार और सद्बुद्धि से आलोकित करें।

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