ट्रिपल एस ओ न्यूज, बीकानेर। आज श्री लक्ष्मीनाथ जी मंदिर परिसर स्थित राव बीकाजी छतरी स्थल पर रातीघाटी युद्ध के अमर शहीदों की पुण्य स्मृति में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। यह आयोजन रातीघाटी समिति, बीकानेर द्वारा प्रतिवर्ष की भाँति इस वर्ष भी विजय दिवस (मिगसर कृष्ण पंचमी) के अवसर पर किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत और धार्मिक अनुष्ठान
कार्यक्रम का शुभारंभ समिति मंत्री पंडित ओम नारायण श्रीमाली द्वारा मंगलाचरण और स्वस्ति वाचन से हुआ। मंदिर प्रांगण में उपस्थित श्रद्धालुओं, गणमान्य नागरिकों एवं इतिहास प्रेमियों ने सामूहिक रूप से दीप प्रज्वलन कर वीर हुतात्माओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।
इतिहास की गौरवगाथा
संस्थापक महामंत्री श्री जानकी नारायण श्रीमाली ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि आज से 491 वर्ष पूर्व बीकानेर की इस पवित्र भूमि पर राव जैतसी के नेतृत्व में हुए रातीघाटी युद्ध ने इतिहास में अमिट छाप छोड़ी।
उन्होंने बताया कि उस समय दुर्ग, मंदिर और मातृभूमि की रक्षा के लिए किलेदार भोजराज रूपावत, सेनापति महेश दास सांखला, दीवान सद्दारण मोहता और जैतुंग भाटियों ने अदम्य साहस और अटूट निष्ठा का परिचय देते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए।
ढाई हजार दुर्ग रक्षकों की सेना में से विरले ही जीवित बचे, किंतु उनके अद्भुत पराक्रम के कारण राव जैतसी की युद्धनीति सफल हुई और आधी रात किए गए आकस्मिक आक्रमण में मुगल सेना को पराजय का सामना करना पड़ा।
यह विजय न केवल बीकानेर के इतिहास में बल्कि सम्पूर्ण राजस्थान की वीरगाथाओं में स्वर्ण अक्षरों में अंकित है।
समिति अध्यक्ष का वक्तव्य
समिति अध्यक्ष श्री नरेंद्र सिंह बीका ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने मातृभूमि की रक्षा हेतु जिस साहस और बलिदान का परिचय दिया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत है।
उन्होंने कहा कि “हमारी संस्कृति में वीरों की स्मृति को जीवंत रखना मात्र परंपरा नहीं, बल्कि कृतज्ञता का प्रतीक है। यह दिवस हमें याद दिलाता है कि देश और धर्म की रक्षा के लिए समर्पण सर्वोच्च धर्म है।”
श्रद्धांजलि अर्पण एवं सहभागिता
कार्यक्रम के अंत में शहीदों की प्रतिमाओं एवं स्मृति स्थल पर गुलाब पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई।
मंदिर परिसर “वीर वंदन” के नारों से गूंज उठा और उपस्थित जनसमूह ने दो मिनट का मौन रखकर शहीदों को नमन किया।
इस अवसर पर सर्वश्री प्रदीप सिंह चौहान, तेजमाल सिंह टांट, छत्रसेन, श्याम सुंदर देराश्री, श्याम लाल शर्मा, अशोक श्रीमाली, आरती सांखला, टीना चौहान, सलोनी गहलोत, गोविंद श्रीमाली सहित अनेक गणमान्य नागरिक, महिलाएँ एवं युवा उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन समिति सदस्य श्री श्याम सुंदर देराश्री ने किया तथा आभार व्यक्त श्री तेजमाल सिंह टांट ने किया।
समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।