ट्रिपल एस ओ न्यूज, सूरतगढ़ | 1 अगस्त | सुभाष सिंह।केंद्र और राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार होने के बावजूद सूरतगढ़ शहर में विकास कार्यों की रफ्तार पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि भाजपा की अंदरूनी गुटबाज़ी, प्रशासनिक खींचतान और जनप्रतिनिधियों की निष्क्रियता के कारण शहर की मूलभूत समस्याएं लगातार बढ़ती जा रही हैं।
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| सूरतगढ़: भाजपा की गुटबाज़ी और अफ़सरशाही के फेर में अटका शहर का विकास |
नगरपालिका, जलदाय विभाग, बिजली विभाग और सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) सहित कई सरकारी कार्यालयों में आमजन के कार्य समय पर नहीं होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। लोगों का कहना है कि विकास के दावों के बावजूद शहर की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है।
खस्ताहाल सड़कें, बदहाल सफाई व्यवस्था
शहर की अधिकांश सड़कें क्षतिग्रस्त हैं, जिससे लोगों को रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नाले और नालियां गंदगी से अटे पड़े हैं तथा कई स्थानों पर ओवरफ्लो की स्थिति बनी हुई है। सफाई व्यवस्था भी प्रभावित बताई जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर के प्रमुख स्थानों से वर्षों पहले लगाए गए डस्टबिन भी गायब हो चुके हैं, जिससे स्वच्छता व्यवस्था और प्रभावित हुई है।
ईओ के तबादलों के बीच विकास कार्य प्रभावित
स्थानीय लोगों के अनुसार पूर्व अधिशाषी अधिकारी (ईओ) पूजा शर्मा के कार्यकाल को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि उनके कार्यकाल में विकास कार्यों की अपेक्षा कुछ चुनिंदा ठेकेदारों को अधिक प्राथमिकता दी गई।
इसके बाद ईओ मनीष पारीक ने पदभार संभालते ही वार्डों का दौरा कर समस्याओं का जायजा लेना शुरू किया, जिससे नागरिकों में विकास कार्यों को लेकर उम्मीद जगी। हालांकि, बाद में प्रशासनिक फेरबदल के तहत गणपत राम को नगरपालिका का नया अधिशाषी अधिकारी नियुक्त कर दिया गया।
विशेष रिपोर्ट: वाटर पार्क निर्माण की गुणवत्ता पर उठे सवाल
प्राचीन गणेश मंदिर ढाब क्षेत्र में करोड़ों रुपये की लागत से बनाए जा रहे वाटर पार्क के निर्माण कार्य को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग किया जा रहा है और कई हिस्सों में निर्माण की परतें समय से पहले उखड़ने लगी हैं।
चर्चा यह भी है कि पूर्व अधिकारियों के कार्यकाल में ठेकेदार को बड़े भुगतान किए जा चुके हैं। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
स्थानीय नागरिकों ने उपखंड प्रशासन और जिला कलेक्टर से पूरे निर्माण कार्य की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराने तथा यदि अनियमितताएं पाई जाएं तो जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।

