सत्ता की राजनीति में बदहाल हुआ सूरतगढ़, 10 दिन में ईओ का स्थानांतरण, जनता में आक्रोश

ट्रिपल एस ओ न्यूज, सूरतगढ़, 3 अगस्त। शहर में विकास कार्यों के ठप पड़ने और नगरपालिका में लगातार हो रहे प्रशासनिक फेरबदल को लेकर आमजन में असंतोष बढ़ता जा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि राजनीतिक खींचतान और सत्ता के प्रभाव के कारण शहर का विकास प्रभावित हो रहा है तथा मूलभूत सुविधाओं की स्थिति लगातार बिगड़ रही है।

सत्ता की राजनीति में बदहाल हुआ सूरतगढ़, 10 दिन में ईओ का स्थानांतरण, जनता में आक्रोश
सत्ता की राजनीति में बदहाल हुआ सूरतगढ़, 10 दिन में ईओ का स्थानांतरण, जनता में आक्रोश

बदहाल बुनियादी ढांचा, जनता परेशान

शहर की मुख्य सड़कों से लेकर वार्डों तक कई मार्ग क्षतिग्रस्त हैं। सफाई व्यवस्था प्रभावित है और अनेक स्थानों पर पेयजल पाइपलाइनों में लीकेज की समस्या बनी हुई है। इसके अलावा बार-बार होने वाली बिजली कटौती, अनियंत्रित यातायात तथा बढ़ती आपराधिक घटनाओं से आमजन परेशान हैं।

हल्की बारिश के बाद भी शहर के कई मुख्य मार्गों और गलियों में जलभराव की स्थिति बन जाती है। इससे स्कूली बच्चों और आम नागरिकों को आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। कई अभिभावक सुरक्षा कारणों से बच्चों को घर पर ही रोक लेते हैं, जबकि कुछ विद्यालयों को जलभराव के चलते अवकाश घोषित करना पड़ता है।

प्रशासनिक फेरबदल पर उठ रहे सवाल

नगरपालिका में अधिकारियों के लगातार हो रहे तबादलों को लेकर भी लोगों में नाराजगी है। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा है कि हाल ही में अनूपगढ़ से स्थानांतरित होकर आए अधिशासी अधिकारी (ईओ) मनीष कुमार पारीक ने पदभार संभालने के बाद जनसमस्याओं के समाधान के लिए मौके पर जाकर कार्य करना शुरू किया था, लेकिन कार्यभार ग्रहण करने के लगभग 10 दिनों के भीतर ही उन्हें एपीओ कर दिया गया।

इसे लेकर नागरिकों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि जनहित में कार्य शुरू करने वाले अधिकारी का इतनी कम अवधि में स्थानांतरण किन कारणों से किया गया।

नए अधिकारी से उम्मीदें

ईओ मनीष कुमार पारीक के स्थान पर अब गणपत राम को सूरतगढ़ नगरपालिका का अधिशासी अधिकारी नियुक्त किया गया है। शहरवासी उम्मीद कर रहे हैं कि नए अधिकारी के नेतृत्व में लंबे समय से लंबित विकास कार्यों में गति आएगी और बुनियादी समस्याओं का समाधान होगा।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि विकास कार्यों में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ तो आगामी नगरपालिका चुनावों में इसका असर देखने को मिल सकता है।

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