ट्रिपल एस ओ न्यूज, सूरतगढ़, 26 जुलाई (सुभाष सिंह)। शहर की अधिकांश मुख्य सड़कें और वार्डों की गलियों की सड़कें लंबे समय से जर्जर होकर गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं। इन सड़कों पर रोजाना आवागमन करने वाले स्थानीय लोगों के साथ-साथ बाहर से आने वाले वाहन चालकों को भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जगह-जगह बने गहरे गड्ढों के कारण वाहनों के एक्सल टूटने, टायर पंचर होने और अन्य तकनीकी नुकसान की घटनाएं आम हो गई हैं।
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| सूरतगढ़ की सड़कों का बुरा हाल: गड्ढों में तब्दील मार्गों से जनता परेशान, जिम्मेदार विभागों पर उठे सवाल |
शहर की कई सड़कें सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) के अधीन हैं, जबकि वार्डों की अधिकांश सड़कें नगर पालिका के अधिकार क्षेत्र में आती हैं। लेकिन जब जिम्मेदारी तय करने की बात आती है तो दोनों विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते नजर आते हैं। आमजन के लिए यह समझना भी मुश्किल हो जाता है कि किस सड़क की देखरेख किस विभाग की जिम्मेदारी है।
मानसून की बारिश के बाद हालात और अधिक खराब हो गए हैं। मुख्य बाजारों और कई वार्डों में जलभराव के कारण गड्ढे पानी से भर गए हैं, जिससे दुर्घटना का खतरा कई गुना बढ़ गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि वर्षों से सड़क निर्माण में गुणवत्ता की अनदेखी की जा रही है। ठेकेदारों और अधिकारियों की कथित मिलीभगत के कारण नई बनी सड़कें भी गारंटी अवधि पूरी होने से पहले ही क्षतिग्रस्त हो जाती हैं।
बारिश के बाद सड़कों के टूटने का हवाला देकर पहले पैचवर्क कराया जाता है, लेकिन यह कार्य भी अक्सर गुणवत्ता के मानकों पर खरा नहीं उतरता। कुछ ही समय में पैचवर्क उखड़ जाता है और सड़कें फिर पहले जैसी हो जाती हैं। इसके बाद नए निर्माण के लिए टेंडर जारी किए जाते हैं, लेकिन कई मामलों में नई सड़कें भी एक-दो वर्ष के भीतर खराब हो जाती हैं।
शहरवासियों का कहना है कि लंबे समय से यह स्थिति बनी हुई है, लेकिन जनप्रतिनिधियों की ओर से भी इस मुद्दे पर अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई गई। कुछ जनप्रतिनिधियों ने आवाज उठाई, लेकिन उसका भी कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया।
इसी बीच नगर पालिका में नए अधिशासी अधिकारी (ईओ) मनीष पारीक ने कार्यभार संभाला है। नागरिकों की मांग है कि पालिका क्षेत्र में होने वाले प्रत्येक निर्माण कार्य स्थल पर सूचना बोर्ड अनिवार्य रूप से लगाया जाए, जिसमें कार्य का नाम, लागत, ठेकेदार फर्म का नाम, कार्य प्रारंभ एवं समाप्ति तिथि तथा गारंटी अवधि स्पष्ट रूप से अंकित हो। इससे आमजन को निर्माण कार्यों की पारदर्शिता की जानकारी मिल सकेगी और जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी।
साथ ही नागरिकों ने सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा कराए गए सड़क निर्माण कार्यों की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। इसके अलावा पूर्व ईओ पूजा शर्मा के कार्यकाल में जारी किए गए टेंडरों और उनके तहत हुए निर्माण कार्यों की भी निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठाई गई है।

