परमवीर चक्र विजेता कंपनी हवालदार मेजर पीरू सिंह शेखावत के अदम्य शौर्य को नमन, 78वें शहादत दिवस पर गौरव सेनानी एसोसिएशन बीकाणा ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

ट्रिपल एस ओ न्यूज, बीकानेर, 18 जुलाई। देश के सर्वोच्च वीरता सम्मान परमवीर चक्र से अलंकृत अमर शहीद कंपनी हवालदार मेजर पीरू सिंह शेखावत के 78वें शहादत दिवस पर शनिवार को गौरव सेनानी एसोसिएशन, बीकाणा द्वारा श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। समारोह में बड़ी संख्या में पूर्व सैनिकों, सैन्य अधिकारियों, समाज के प्रबुद्ध नागरिकों एवं युवाओं ने शहीद के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी तथा उनके अद्वितीय साहस, राष्ट्रभक्ति और सर्वोच्च बलिदान को नमन किया।

परमवीर चक्र विजेता कंपनी हवालदार मेजर पीरू सिंह शेखावत के अदम्य शौर्य को नमन, 78वें शहादत दिवस पर गौरव सेनानी एसोसिएशन बीकाणा ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि
परमवीर चक्र विजेता कंपनी हवालदार मेजर पीरू सिंह शेखावत के अदम्य शौर्य को नमन, 78वें शहादत दिवस पर गौरव सेनानी एसोसिएशन बीकाणा ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता कर्नल हेम सिंह शेखावत (सेना मेडल) ने कहा कि कंपनी हवालदार मेजर पीरू सिंह शेखावत भारतीय सेना के उन अमर वीरों में से हैं, जिनकी वीरता की गाथा आज भी प्रत्येक सैनिक और देशवासी के लिए प्रेरणास्रोत बनी हुई है। उन्होंने बताया कि 18 जुलाई 1948 को जम्मू-कश्मीर के टीटवाल सेक्टर में 6 राजपूताना राइफल्स को दुश्मन के कब्जे वाली एक अत्यंत महत्वपूर्ण पहाड़ी पर अधिकार करने का दायित्व सौंपा गया था। भीषण गोलाबारी और लगातार हो रहे हथगोले के हमलों के बीच उनकी टुकड़ी के अधिकांश सैनिक शहीद अथवा घायल हो गए, लेकिन स्वयं गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद पीरू सिंह ने पीछे हटने के बजाय अकेले ही दुश्मन पर धावा बोल दिया।

उन्होंने दुश्मन के मशीनगनों से लैस दो बंकरों को ध्वस्त कर दिया और अंतिम क्षणों तक युद्ध करते हुए शत्रु के एक और मजबूत ठिकाने को नष्ट किया। मातृभूमि की रक्षा करते हुए उन्होंने वीरगति प्राप्त की। उनके इस अद्वितीय शौर्य, अदम्य साहस और सर्वोच्च बलिदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया, जो देश का सर्वोच्च सैन्य वीरता सम्मान है।

क्षत्रिय सभा एवं ट्रस्ट, बीकानेर संभाग के प्रवक्ता प्रदीप सिंह चौहान ने अपने संबोधन में कहा कि पीरू सिंह शेखावत का जीवन अनुशासन, संघर्ष, कर्तव्यनिष्ठा और देशभक्ति का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1936 में वे झेलम स्थित पंजाब रेजीमेंट की 10वीं बटालियन में भर्ती हुए। प्रशिक्षण पूर्ण करने के बाद वर्ष 1937 में उन्हें 5वीं बटालियन में नियुक्त किया गया। सैन्य सेवा के साथ उन्होंने शिक्षा को भी महत्व दिया और विभिन्न परीक्षाएँ उत्तीर्ण कर 7 अगस्त 1940 को लांस नायक के पद पर पदोन्नति प्राप्त की। उत्तर-पश्चिम सीमांत क्षेत्र में अपनी सेवाओं के दौरान भी उन्होंने असाधारण सैन्य कौशल, साहस और नेतृत्व क्षमता का परिचय दिया।

वक्ताओं ने कहा कि पीरू सिंह शेखावत केवल राजस्थान ही नहीं, बल्कि पूरे देश का गौरव हैं। उनका जीवन बताता है कि राष्ट्र की रक्षा के लिए समर्पण, साहस और कर्तव्य सर्वोपरि हैं। आज की युवा पीढ़ी यदि उनके आदर्शों को अपने जीवन में उतार ले, तो राष्ट्र और समाज दोनों सशक्त बन सकते हैं।

श्रद्धांजलि सभा में सूबेदार मेजर रूपसिंह राठौड़, सूबेदार माधो सिंह, सूबेदार मेजर बलबीर सिंह, सूबेदार किसन सिंह शेखावत, नगेंद्र सिंह शेखावत, नरेंद्र सिंह आबडसर, शिवबाड़ी मंडल अध्यक्ष, पार्षद संजय गुप्ता, भगवान सिंह राठौड़ सहित अनेक पूर्व सैनिकों, समाजसेवियों एवं गणमान्य नागरिकों ने अपने विचार व्यक्त करते हुए अमर शहीद को श्रद्धासुमन अर्पित किए।


कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर शहीद पीरू सिंह शेखावत को श्रद्धांजलि दी तथा संकल्प लिया कि उनके त्याग, पराक्रम और राष्ट्रसेवा की प्रेरणा को जन-जन तक पहुंचाया जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी ऐसे वीर सपूतों के आदर्शों से प्रेरणा लेकर राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानें।

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