ट्रिपल एस ओ न्यूज, बीकानेर, राजस्थान। भारत की विकास यात्रा में नारी शक्ति का योगदान केवल एक अध्याय नहीं, बल्कि पूरी पुस्तक का आधार है। ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ मात्र एक कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि नेतृत्व के आकाश में महिलाओं के बढ़ते कदमों की वह आहट है, जो अब पंचायत की चौपाल से लेकर संसद की दहलीज तक नए भारत की पटकथा लिखेगी। 33 प्रतिशत आरक्षण केवल एक संख्या नहीं, बल्कि उन करोड़ों महिलाओं की सामूहिक जीत है जिन्होंने दशकों तक अपने हक के लिए संघर्ष किया है।
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| कलम भी उनकी, कानून भी उनका—अब देश की नियति में हिस्सा भी महिलाओं का: डॉ. पूजा मोहता |
राजस्थान की विरासत और आधुनिक संकल्प
राजस्थान की यह वीर धरा गवाह है कि यहाँ की मिट्टी ने हमेशा साहस को जन्म दिया है। पन्नाधाय का बलिदान, रानी पद्मिनी का स्वाभिमान और मीराबाई की भक्ति—ये उदाहरण सिद्ध करते हैं कि बौद्धिक और आत्मिक चेतना पर किसी एक लिंग का अधिकार नहीं है। आज बीकानेर की बेटियाँ खेल के मैदान से लेकर पर्यावरण संरक्षण के आंदोलनों तक अपनी प्रशासनिक क्षमता सिद्ध कर रही हैं। अब समय ‘बेनिफिशियरी’ कहलाने का नहीं, बल्कि ‘लीडर’ बनकर राष्ट्र निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाने का है।
आधी आबादी, पूरा हक: 50% की ओर बढ़ते कदम
यह अधिनियम भारतीय संसदीय इतिहास का वह ऐतिहासिक कानून है, जिसने महिलाओं के लिए राजनीति के द्वार खोले हैं। लेकिन यह तो बस शुरुआत है, अभी मंज़िल और भी ऊँची है। मेरा स्पष्ट मानना है कि “जब देश की आबादी आधी है, तो हक भी पूरा होना चाहिए।”
आज हमने 33 प्रतिशत का संकल्प सिद्ध किया है, और आने वाले समय में 50 प्रतिशत की पूर्ण भागीदारी के साथ ही एक समर्थ और समृद्ध भारत की नींव रखी जाएगी।
नारी शक्ति का वंदन ही राष्ट्र का वंदन
जब एक महिला सशक्त होती है, तो वह पूरे समाज और आने वाली पीढ़ियों को नई दिशा देती है। भारत को विश्वगुरु बनाने की दिशा में महिलाओं की समान भागीदारी ही सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक स्वतंत्रता के साथ-साथ जब महिलाओं के निर्णयों का सम्मान होगा, तभी सशक्तिकरण का वास्तविक अर्थ सार्थक होगा।
“आधी आबादी, पूरा हक — यही है नए भारत का संकल्प!”

