शार्दूल राजस्थानी रिसर्च इंस्टीट्यूट की ऐतिहासिक पांडुलिपियों के डिजिटाइजेशन का कार्य शुरू

ट्रिपल एस ओ न्यूज, बीकानेर, 9 मार्च। शार्दूल राजस्थानी रिसर्च इंस्टीट्यूट की सैंकड़ों वर्ष पुरानी पांडुलिपियों के संरक्षण के लिए डिजिटाइजेशन का कार्य सोमवार को शुरू हुआ। भारत सरकार के महत्वाकांक्षी ज्ञान भारतम् मिशन के जनवरी में जयपुर के विश्व गुरुदीप आश्रम शोध संस्था और इंस्टीट्यूट के मध्य इन पांडुलिपियों के संरक्षण के लिए एमओयू हुआ था। इसके तहत संस्था के तकनीकी प्रतिनिधियों ने पांडुलिपियों के संरक्षण कार्य प्रारम्भ किया। 

शार्दूल राजस्थानी रिसर्च इंस्टीट्यूट की ऐतिहासिक पांडुलिपियों के डिजिटाइजेशन का कार्य शुरू
शार्दूल राजस्थानी रिसर्च इंस्टीट्यूट की ऐतिहासिक पांडुलिपियों के डिजिटाइजेशन का कार्य शुरू


इस दौरान वरिष्ठ साहित्यकार डाॅ. मंदन सैनी, जनसंपर्क विभाग के उप निदेशक डाॅ. हरिशंकर आचार्य, गीतकार राजाराम स्वर्णकार तथा पुस्तकालयाध्यक्ष विमल शर्मा अतिथि के रूप में मौजूद रहे। इंस्टीट्यूट के सचिव राजेन्द्र जोशी ने बताया कि 27 जनवरी को सादूल राजस्थानी रिसर्च इंस्टीट्यूट तथा कलस्टर केंद्र विश्वगुरूदीप आश्रम शोध संस्थान, जयपुर के मध्यम एमओयू पर हस्ताक्षर हुए। इसके अनुसार इंस्टीट्यूट की अनमोल हस्तलिखित पांडुलिपियां डिजिटल रूप में सुरक्षित होंगी, जो राजस्थानी साहित्य और सांस्कृतिक विरासत के अध्ययन को नई दिशा प्रदान करेगा।


इस दौरान डाॅ. सैनी ने कहा कि ज्ञान भारतम् मिशन का यह कदम हमारी ऐतिहासिक धरोहर को लुप्त होने से बचाएगा तथा भावी पीढ़ी को हम यह सांस्कृतिक एवं साहित्यिक विरासत सौप सकेंगे। उन्होंने कहा कि सदियों पूर्व लिखे गए यह हस्तलिखित ग्रंथ हमारी अमूल्य विरासत है। इनका संरक्षण अच्छी पहल है। 


डाॅ. आचार्य ने कहा कि केन्द्र और राज्य सरकार, हमारी सांस्कृतिक विरासत को पल्लवित, पोषित एवं इसके संवर्धन की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि आज का दौर डिजिटलीकरण का है। ऐसे में पांडुलिपियां डिजिटाज्ड होंगी तो यह सदियों तक संरक्षित रहेंगी। उन्होंने कहा कि इंस्टीट्यूट ने इन पांडुलिपियों को दशकों तक संरक्षित रख, मिसाल पेश की। अब सरकार इसे और आगे बढ़ा रही है। 


संस्था संयोजक राजाराम स्वर्णकार ने बताया कि विश्व गुरूदीप आश्रम शोध संस्थान द्वारा इन पांडुलिपियों का निःशुल्क डिजिटलीकरण किया जाएगा। डिजिटाइजेशन का यह कार्य संस्थान के तकनीकी विशेषज्ञों आश्रम के मोहित बिस्सा और लव कुमार देराश्री द्वारा इंस्टीट्यूट के पदाधिकारियों की देखरेख में होगा। उन्होंने बताया कि इंस्टीट्यूट की 250 से अधिक पांडुलिपियों को संरक्षित किया जाएगा। पुस्तकायाध्यक्ष विमल शर्मा ने आगंतुकों का आभार जताया।

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