ट्रिपल एस ओ न्यूज, बीकानेर। पटवार हल्का रिडमलसर पुरोहितान स्थित खसरा संख्या 288/81 की 9 बीघा 9 बिस्वा कृषि भूमि से जुड़े विवाद में न्यायालय ने अत्यंत महत्वपूर्ण और निर्णायक आदेश पारित किया है। न्यायालय ने अनुसंधान अधिकारी द्वारा प्रस्तुत अंतिम रिपोर्ट (एफआर) को गंभीर विरोधाभासों और जांच में लापरवाही के आधार पर खारिज करते हुए मामले में पुनः विस्तृत और निष्पक्ष अनुसंधान के निर्देश दिए हैं।
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| रिडमलसर भूमि विवाद प्रकरण में न्यायालय का बड़ा आदेश, त्रुटिपूर्ण जांच पर एफआर खारिज, पुनः अनुसंधान के निर्देश |
न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि अनुसंधान अधिकारी की रिपोर्ट स्वयं विरोधाभासी है। एक ओर रिपोर्ट में खसरा संख्या 288/81 की भूमि को “अज्ञात” बताया गया है, जबकि दूसरी ओर उसी भूमि का नामांतरण भंवरी देवी से फर्म भंवरलाल पूर्णाराम के नाम दर्ज होना स्वीकार किया गया है। यह तथ्य न केवल जांच की गंभीर त्रुटि को दर्शाता है, बल्कि पूरे प्रकरण में संदेह की स्थिति उत्पन्न करता है।
अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि अनुसंधान अधिकारी ने विवादित भूमि के नामांतरण से जुड़े मूल दस्तावेज, आदेश और राजस्व रिकॉर्ड प्राप्त करने का कोई गंभीर प्रयास नहीं किया। न तो तहसीलदार से आवश्यक पूछताछ की गई और न ही नामांतरण के आधारों की जांच की गई। केवल पटवारी के बयान के आधार पर रिपोर्ट प्रस्तुत करना न्यायालय की दृष्टि में अपर्याप्त और अस्वीकार्य है।
न्यायालय ने पुलिस थाना जेएनवीसी को निर्देश दिए हैं कि वह प्रकरण में विवादित भूमि से संबंधित समस्त राजस्व अभिलेख, जमाबंदी, नामांतरण आदेश, कथित फर्जी दस्तावेजों तथा संबंधित राजस्व अधिकारियों की भूमिका की गहन जांच कर यथाशीघ्र विस्तृत रिपोर्ट न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करे।
इस आदेश के बाद यह मामला केवल भूमि विवाद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसमें कथित फर्जीवाड़े, दस्तावेजों की कूटरचना और प्रशासनिक जिम्मेदारी जैसे गंभीर पहलुओं की जांच की आवश्यकता स्पष्ट हो गई है। न्यायालय का यह आदेश निष्पक्ष जांच और न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

