ट्रिपल एस ओ न्यूज, बीकानेर। नगर निगम की सेवानिवृत्त सफाई कर्मचारी एवं दलित समाज की बुजुर्ग महिला मोहनी देवी (पत्नी स्वर्गीय ग्यारसा राम), निवासी भीनासर ने गंगाशहर पुलिस थाने में दर्ज एफआईआर के अनुसंधान को लेकर गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस अधीक्षक (एसपी) बीकानेर से न्याय की गुहार लगाई है।
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| दलित समाज की बुजुर्ग महिला ने पुलिस अनुसंधान पर उठाए गंभीर सवाल; बीकानेर एसपी से लगाई निष्पक्ष जांच व न्याय की गुहार |
परिवादिया मोहनी देवी ने पुलिस अधीक्षक को सौंपे अपने परिवाद में बताया कि गंगाशहर थाने में दर्ज एफआईआर संख्या 190/2026 में पर्याप्त साक्ष्य और दस्तावेज प्रस्तुत किए जाने के बावजूद वर्तमान अनुसंधान अधिकारी द्वारा अपेक्षित व निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि 18 जुलाई 2026 को मामला दर्ज होने के इतने दिन बीत जाने के बाद भी नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई है, उल्टे उन पर मामले में राजीनामा करने के लिए लगातार दबाव बनाया जा रहा है।
धोखाधड़ी और अमानत में खयानत के गंभीर आरोप परिवाद के अनुसार, आरोपी अनिल कुमार सैन ने पूर्व पहचान का फायदा उठाते हुए बुजुर्ग महिला को बैंक से ऋण दिलवाने का झांसा दिया था। इसी विश्वास में आरोपी ने उनके बैंक खाते की पासबुक, चेकबुक, पहचान संबंधी आवश्यक दस्तावेज और एटीएम कार्ड अपने पास रख लिए। आरोप है कि इसके बाद उनके नाम पर विभिन्न बैंकों से ऋण स्वीकृत करवाकर उस राशि का गबन किया गया तथा उनके एसबीआई बैंक खाते से यूपीआई के जरिए बिना उनकी जानकारी के लगातार राशि अन्य खातों में स्थानांतरित की जाती रही।
चेक के दुरुपयोग व आभूषण हड़पने की शिकायत मोहनी देवी ने यह भी आरोप लगाया कि उनके हस्ताक्षरशुदा चेक का दुरुपयोग कर 10 लाख और 8 लाख रुपये के झूठे मामले न्यायालय में प्रस्तुत कर दिए गए हैं, जबकि उन्होंने आरोपित पक्ष से कोई लेन-देन या उधार राशि नहीं ली थी। इसके अतिरिक्त, सुरक्षित रखने के उद्देश्य से सौंपे गए उनके तथा उनकी दोनों पुत्रवधुओं के सोने-चांदी के आभूषण भी आरोपी द्वारा मांगने पर वापस नहीं लौटाए जा रहे हैं।
जांच अधिकारी बदलने और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग बुजुर्ग परिवादिया ने कहा कि वर्तमान जांच अधिकारी के रवैये के चलते उन्हें स्थानीय स्तर पर न्याय मिलने की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है। उन्होंने पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि मामले की संवेदनशीलता और बुजुर्ग महिला के साथ हुए वित्तीय उत्पीड़न को देखते हुए एफआईआर संख्या 190/2026 का अनुसंधान तत्काल प्रभाव से किसी अन्य निष्पक्ष उच्चाधिकारी को सौंपा जाए, ताकि साक्ष्यों के आधार पर पारदर्शी जांच हो सके और आरोपियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जा सके।

