ट्रिपल एस ओ न्यूज, बीकानेर। विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के संविधान निर्माता और भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर जी की पुण्यतिथि पर मदर्स एल.एस. कर्मा फाउंडेशन की ओर से विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. सुमन चौधरी के नेतृत्व में बीकानेर के विभिन्न विद्यालयों में छात्र-छात्राओं के साथ संवाद रखा गया तथा बच्चों को स्टेशनरी सामग्री वितरित की गई।
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| बाबासाहेब अंबेडकर की पुण्यतिथि पर मदर्स LS कर्मा फाउंडेशन द्वारा विद्यार्थियों के बीच संवाद व स्टेशनरी वितरण |
डॉ. अंबेडकर के जीवन, कार्य और उनके द्वारा समाज को दिए गए अधिकारों—विशेषकर दलित, वंचित और उपेक्षित समाज को आवाज़, अधिकार व आत्मसम्मान प्रदान करने—पर विद्यार्थियों को विस्तार से अवगत कराया गया।
कार्यक्रम में यह बताया गया कि डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने शिक्षा, संगठन और संघर्ष को सामाजिक परिवर्तन का आधार बनाया तथा संविधान के माध्यम से समानता, स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय की मजबूत नींव रखी।
डॉ. सुमन चौधरी का संबोधन
शनिवार को चक गरबी में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए डॉ. चौधरी ने कहा कि शिक्षा जीवन को बदलने की सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने बच्चों को निरंतर प्रयास करते हुए अपने करियर में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया और महिला सशक्तिकरण पर विशेष जोर दिया।
उन्होंने विद्यार्थियों को संविधान में निहित मौलिक अधिकारों, विशेषकर समानता, स्वतंत्रता, छुआछूत के अंत, आरक्षण तथा शिक्षा के अधिकार के महत्व के बारे में बताया।
सुश्री ज्योति चौधरी का वक्तव्य
सुश्री ज्योति चौधरी ने डॉ. अंबेडकर के योगदान, जीवन संघर्ष और सामाजिक न्याय हेतु उनके प्रयासों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि डॉ. अंबेडकर ने कमजोर, वंचित तथा उपेक्षित वर्गों के अधिकारों की रक्षा के लिए आजीवन संघर्ष किया, जो समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
कार्यक्रम में श्रीमती चंद्रकला, श्रीमती सुमन, श्रीमती सुनीता डोटासरा सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

