लक्ष्मीनारायण रंगा की रचनाएं आज भी प्रासंगिक और प्रेरणादायी : बुलाकी शर्मा

ट्रिपल एस ओ न्यूज, बीकानेर, 17 अक्टूबर 2026: अजित फाउण्डेशन के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम ‘सृजन सौरभ लक्ष्मीनारायण रंगा’ का शनिवार को पुस्तक प्रदर्शनी के साथ विधिवत शुभारंभ हुआ। समारोह की अध्यक्षता करते हुए प्रख्यात साहित्यकार एवं व्यंग्यकार बुलाकी शर्मा ने कहा कि लक्ष्मीनारायण रंगा द्वारा रचित साहित्य कालजयी है; उनकी कविताएं चाहे जिस दौर में लिखी गई हों, वे आज भी पूरी तरह प्रासंगिक हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए भी मार्गदर्शक रहेंगी। उनकी रचनाओं में सामाजिक सरोकार, समरसता और तीखे व्यंग्य का अनूठा समन्वय मिलता है। रंगा जी सदैव नवीन शिल्प और सृजनात्मक प्रयोगों को प्रोत्साहित करने वाले रचनाकार थे।

लक्ष्मीनारायण रंगा की रचनाएं आज भी प्रासंगिक और प्रेरणादायी : बुलाकी शर्मा
लक्ष्मीनारायण रंगा की रचनाएं आज भी प्रासंगिक और प्रेरणादायी : बुलाकी शर्मा


समारोह के विशिष्ट अतिथि उर्दू के वरिष्ठ शायर ज़ाकिर अदीब ने कहा कि रंगा जी रचना को निरंतर माँझने और तराशने के पक्षधर थे। उन्होंने हिन्दी, राजस्थानी तथा ग़ज़ल विधा में विपुल और समृद्ध साहित्य सृजन किया। वे नवोदित रचनाकारों के सच्चे संबल और प्रेरणास्रोत रहे हैं।

इससे पूर्व लक्ष्मीनारायण रंगा द्वारा रचित लगभग 130 पुस्तकों की भव्य प्रदर्शनी का उद्घाटन बुलाकी शर्मा, ज़ाकिर अदीब, डॉ. कमल रंगा एवं सुनील बोड़ा ने किया। प्रदर्शनी में हिन्दी एवं राजस्थानी की विविध विधाओं की कृतियों को प्रदर्शित किया गया है। फाउण्डेशन के समन्वयक संजय श्रीमाली ने विषय प्रवर्तन करते हुए कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य रंगा जी के व्यक्तित्व, कृतित्व और साहित्यिक अवदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है।

कार्यक्रम के आरंभ में युवा साहित्यकार कासिम बीकानेरी ने रंगा जी के जीवन-वृत्त पर प्रकाश डाला। दूसरे सत्र में आयोजित काव्य-गोष्ठी में राजस्थानी कविता का वाचन विप्लव व्यास ने किया। हिन्दी काव्य पाठ में अक्षिता जोशी, आनंद छंगाणी, शिवप्रकाश शर्मा, आनंद पुरोहित ‘मस्ताना’, भावना स्वामी व महक आचार्य ने प्रस्तुतियां दीं। वहीं डॉ. शकीला बानो एवं मोईनुद्दीन ‘मोईन’ ने ग़ज़लें तथा गौरीशंकर सोनी ने सुमधुर राजस्थानी गीत प्रस्तुत किया। अंत में प्रो. नरसिंह बिन्नाणी ने सभी का आभार व्यक्त किया।

आयोजन में डॉ. कमल रंगा, मोहम्मद फारूक, शिव दाधीच, अविनाश व्यास, राजेश रंगा, जुगल किशोर पुरोहित, आत्माराम भाटी, सुनील बोड़ा, पुनीत रंगा, गिरिराज पारीक, गोपाल व्यास, उषा बिस्सा, दीक्षा व्यास और महावीर स्वामी सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी व प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।

कल का व्याख्यान सत्र: रविवार, 18 अक्टूबर को सायं 5:15 बजे लक्ष्मीनारायण रंगा के ‘रंगकर्म, शिक्षा एवं साहित्य’ विषय पर युवा कथाकार हरीश बी. शर्मा व्याख्यान देंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता मूर्धन्य साहित्यकार मालचंद तिवाड़ी करेंगे, जबकि संयोजन वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. कमल रंगा के मार्गदर्शन में रहेगा।

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