ट्रिपल एस ओ न्यूज, बीकानेर, 19 अक्टूबर। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटी छात्राओं के लिए सोमवार को आरम्भ क्लासेज की कक्षा कुछ अलग रही। किताबों और करियर की चर्चा के बीच छात्राओं ने अपने स्वास्थ्य को समझने और उसके प्रति सजग रहने का पाठ पढ़ा। स्नेहलता व्यास मेमोरियल ट्रस्ट, बीकानेर की ओर से स्वर्गीय स्नेहलता व्यास की स्मृति में आयोजित स्तन एवं सर्वाइकल कैंसर जागरूकता सत्र में करीब 70 से 75 छात्राओं ने भाग लिया और स्तन स्वपरीक्षण की विधि जानी।
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| करियर की तैयारी के बीच सेहत का पाठ, 70 से अधिक छात्राओं ने सीखी स्तन स्वपरीक्षण की विधि |
ओल्ड सिटी, नया शहर क्षेत्र स्थित आरम्भ क्लासेज में आयोजित सत्र में आचार्य तुलसी कैंसर अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र, पीबीएम अस्पताल, बीकानेर के कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. पंकज टांटिया ने ऑडियो-वीडियो प्रस्तुतियों के माध्यम से विषय को सरल और सहज भाषा में समझाया। गंभीर विषय पर उनकी आत्मीय प्रस्तुति ने छात्राओं को स्वास्थ्य जागरूकता से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कार्यक्रम की खासियत रही कि जानकारी केवल व्याख्यान तक सीमित नहीं रही। दृश्य-श्रव्य माध्यम से छात्राओं को स्तन स्वपरीक्षण की प्रक्रिया समझने का अवसर मिला। करियर की तैयारी कर रही बेटियों के लिए यह सत्र अपने स्वास्थ्य को भी प्राथमिकता देने का संदेश लेकर आया।
जीके गुरु अमित सोनी ने कहा कि डॉ. टांटिया ने बड़े भाई की तरह अपनत्व भाव से इतने गंभीर विषय की बारीकियां समझाईं। उनकी सहज भाषा और समझाने के आत्मीय अंदाज ने सत्र को छात्राओं के लिए उपयोगी और प्रभावशाली बना दिया।
आरम्भ क्लासेज के निदेशक विमल स्वामी ने आयोजन को शिक्षा के साथ स्वास्थ्य जागरूकता जोड़ने की सार्थक पहल बताया। उन्होंने कहा कि छात्राओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के साथ अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग बनाना भी शिक्षण संस्थानों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
ट्रस्ट के संरक्षक किशन व्यास ने कहा कि स्वर्गीय स्नेहलता व्यास की स्मृति में बेटियों तक स्वास्थ्य संबंधी उपयोगी जानकारी पहुंचाना सेवा का सार्थक माध्यम है। ऐसी पहल की सफलता इसी में है कि छात्राएं मिली जानकारी को अपने जीवन में महत्व दें और परिवार में भी जागरूकता बढ़ाएं।
ट्रस्ट के सचिव विनय थानवी ने कहा कि दुर्गाष्टमी पर बेटियों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने का यह आयोजन शक्ति के सम्मान को व्यावहारिक रूप देता है।
छात्राओं की उत्साहपूर्ण भागीदारी ने बताया कि सहज संवाद और सही माध्यम से गंभीर स्वास्थ्य विषयों को भी प्रभावी ढंग से समझाया जा सकता है।

