नगर निगम के यूजर चार्ज टेंडर पर उठे सवाल, जनप्रतिनिधियों से विमर्श के बिना आर्थिक बोझ डालने का आरोप

ट्रिपल एस ओ न्यूज, बीकानेर, 31 जुलाई। नगर निगम बीकानेर द्वारा पीपीपी (PPP) मॉडल के तहत शहर की सफाई व्यवस्था के लिए जारी किए जा रहे टेंडर का विरोध शुरू हो गया है। टेंडर के तहत आमजन, व्यापारिक एवं औद्योगिक प्रतिष्ठानों से सफाई व्यवस्था के बदले यूजर चार्ज वसूलने का प्रस्ताव है, जिस पर शहर के नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आपत्ति जताई है।

नगर निगम के यूजर चार्ज टेंडर पर उठे सवाल, जनप्रतिनिधियों से विमर्श के बिना आर्थिक बोझ डालने का आरोप
नगर निगम के यूजर चार्ज टेंडर पर उठे सवाल, जनप्रतिनिधियों से विमर्श के बिना आर्थिक बोझ डालने का आरोप

इस संबंध में आमजन की ओर से मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, स्वायत्त शासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा, केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, बीकानेर पूर्व विधायक सिद्धि कुमारी, बीकानेर पश्चिम विधायक जेठानंद व्यास, भाजपा शहर जिलाध्यक्ष सुमन छाजेड़ तथा जिला कलेक्टर निशांत जैन को ईमेल एवं व्हाट्सएप के माध्यम से जनहित ज्ञापन भेजा गया है। ज्ञापन में आम नागरिकों के सहमति हस्ताक्षर भी संलग्न किए गए हैं।

समाजसेवी एवं भाजपा के सक्रिय कार्यकर्ता मनीष बाफना ने कहा कि नगर निगम की वर्तमान व्यवस्थाएं पहले से ही कुप्रबंधन का शिकार हैं। उन्होंने कहा कि शहर में बेहतर सफाई व्यवस्था की आवश्यकता से कोई इंकार नहीं है, लेकिन जनता एवं जनप्रतिनिधियों से चर्चा किए बिना, प्रशासन की जवाबदेही तय किए बिना तथा पर्याप्त तैयारी के अभाव में जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि इस प्रकार का टेंडर लागू किया जाता है तो जनता इसका विरोध करेगी।

भाजपा शहर कार्यकारिणी सदस्य मनोज पारख ने कहा कि शहर पहले से ही सीवरेज व्यवस्था और BKCL की कार्यप्रणाली से परेशान है। कई ऐसे मुद्दे हैं जिनमें आमजन के पास कोई विकल्प नहीं होता और उन्हें प्रशासनिक व्यवस्थाओं के कारण परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि पूर्व के अनुभवों को देखते हुए सरकार और प्रशासन की स्पष्ट जवाबदेही तय करने के बाद ही टेंडर प्रक्रिया आगे बढ़ाई जानी चाहिए।

भाजपा गंगाशहर मंडल के महामंत्री गोविंद सारस्वत ने कहा कि आमजन में यह आशंका है कि इस प्रकार के टेंडर जनहित से अधिक ठेकेदारों के आर्थिक हितों को ध्यान में रखकर लाए जा रहे हैं तथा इससे निगम प्रशासन अपनी जिम्मेदारियों से बचना चाहता है। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संस्थाओं, व्यापारिक एवं औद्योगिक संगठनों के साथ व्यापक चर्चा कर जनहित और प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने के बाद ही इस समस्या का स्थायी समाधान संभव है, अन्यथा यह टेंडर केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगा।

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